|
|
उत्तर भारतीयों पर महाराष्ट्र
नवनिर्माण कार्यकर्ताओं द्वारा हमले की निन्दा-लालू प्रसाद यादव
19 अक्टूबर, 2008 को मुंबई में रेलवे की भर्ती परीक्षा देने गए
युवाओं पर राज ठाकरे के लोगों ने जो हमले किए हैं, उन्हें देखकर
लगता है कि अपनी राजनीतिक जड़ें जमाने के चक्कर में राज ठाकरे
मानसिक संतुलन खो चुके हैं। रेलवे स्टेशनों पर सो रहे या परीक्षा
केद्रों में परीक्षा दे रहे उत्तर भारतीयों पर हमले करने वालों को
क्या यह पता नहीं था कि रेलवे की परीक्षाएं अदालती आदेश पर देश के
विभिन्न हिस्सों में कराई जाती है, और भर्ती बोर्ड खुद ही परीक्षा
केन्द्र तय करता है ? इस परीक्षा के आयोजन और उम्मीदवारों की
सुरक्षा के बारे में राज्य सरकार को पहले से सूचना थी, लेकिन हमलों
के वक्त सरकार और पुलिस मूक दर्शक क्यों बनी रही ?
सवाल सिर्फ रेलवे की नौकरियों का नहीं हैं। शिवसेना से अलग होने के
बाद से ही राज, मराठी लोगों के बीच अपनी पार्टी की जड़ें जमाने के
लिए उत्तर भारत के लोगों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। हमने शुरू से
ही उनकी असंवैधानिक और हिंसक गतिविधियों पर अंकुश की मांग की थी,
लेकिन राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। समय रहते लगाम लगा
देते, तो ये जख्म इतना बड़ा नासूर नहीं बनता। संविधान के हिसाब से
ऐसी बातें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के विरुद्ध हैं। इसलिए राज पर
राजद्रोह और हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा चलना चाहिए। अगर इसी
तरह की हरकतें देश के अन्य हिस्सों में कुछ सिरफिरें लोग शुरू कर
दें, तो क्या होगा ? देश में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो, इससे पहले
ही ऐसी प्रवृत्तियों को कुचल देना चाहिए। राज की अलगाववादी जुबान
और हरकतें तो आतंकवादियों से भी खतरनाक हैं। उन पर तो मकोका लगना
चाहिए।
श्री लालू प्रसाद ने कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि मनसे
कार्यकर्ताओं और राज ठाकरे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। राज ठाकरे
को असामाजिक तत्वों का नेता बताते हुए लालू प्रसाद यादव जी ने कहा
कि उत्तर भारतीयों के खिलाफ वह घृणा और विध्वंशक अभियान चला रहे
हैं जो धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र कि लिए अच्छा नहीं है। मनसे की बजरंग
दल से तुलना करते हुए राजद सुप्रीमो ने दोनों संगठनों पर प्रतिबंध
की मांग की। उन्होंने कहा कि बजंरग दल की तरह राज ठाकरे की पार्टी
भी घृणा फैला रही है और दोनों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
रेलवे कर्मचारियों के बेटों को
नौकरी-लालू प्रसाद यादव
रेलमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव ने 22 अक्टूबर, 2008 को कहा कि वह
रेलवे कर्मचारियों के बेटों को नौकरी देने पर विचार करने के साथ ही
ज्यादा उम्र के कुलियों की सूची भी बनवा रहे हैं ताकि उनके जवान
बेटों को नौकरी देने पर विचार किया जा सकें। |
|
 |
|
|