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बिहार
के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश आजकल (दिसम्बर 2011) सेवा
यात्रा पर हैं। नीतीश बिहार में जनता के बीच जाकर गुनगाण इन्हीं
यात्राओं के माध्यम से पिछले 6 वर्षों से करते आ रहे हैं। नीतीश इन
यात्राओं में बिहार के विकास हेतु नई-नई योजनाओं का केवल शिलान्यास
भी करते हैं। सामान्य वर्गों की चित्कार और मीडिया की आंधी के बीच
पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की आवाज पिछले 5
वर्षों से दब जाया करती थी। इस बार नीतीश को बिहार की जनता का
विरोध का प्रत्येक जिलों में सामना करना पड़ रहा है। बिहार के लोगों
का कहना है नीतीश ने जितनी भी घोषणायें की है वह आज तक पूरा नहीं
हुआ है। नीतीश द्वारा किया गया शिलान्यास का कार्य भी आज तक शुरू
नहीं हुआ है। नीतीश काल में बिहार में केवल राष्ट्रीय राजमार्ग की
हालत सुधरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग के खर्च का जिम्मा केन्द्र
सरकार के पास होता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2010 के परिणाम और एक
ही वर्ष के बाद नीतीश का बिहार में जगह-जगह विरोध समझने के लिए आपको
बिहार की राजनीति समझनी होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री बिहार सरकार श्री लालू प्रसाद यादव पहली बार
मुख्यमंत्री 10 मार्च 1990 को बने थे। उस वक्त श्री यादव जनता दल
में थे। पहले कार्यकाल के बाद फिर चुनाव हुआ और 04-04-1995 को श्री
लालू प्रसाद यादव दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार
मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दल में कुछ वैचारिक मतभेद और पिछड़ा
वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की रक्षा करने
हेतु श्री लालू प्रसाद यादव ने 5 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल
(राजद) नामक अलग पार्टी बना लिया। श्री यादव के साथ जनता दल को
छोड़कर कई विधायक राष्ट्रीय जनता दल में आकर शामिल हो गये।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के गठन के ठीक 20 ही दिन बाद श्री लालू
प्रसाद यादव को बिहार के बहुचर्चित घोटाला के आरोप में जेल जाना
था। राष्ट्रीय जनता दल में अफरा-तफरी मच गई। श्री यादव के नाम पर
जितने भी विधायक जनता दल को छोड़कर राजद में आये थे वह पुनः जनता दल
में वापसी पर विचारने लगे। उस समय के विधायकों में यह धारणा बन रही
थी कि अब सरकार गिर जायेगी और राजद का अस्तित्व खत्म हो जायेगा। अतः
जनता दल ही विकल्प है। श्री लालू प्रसाद यादव को जेल भी जाना था,
राजद को एकजुट रखकर सरकार भी बचानी थी और राजद को विश्वसनीय
उत्तराधिकारी भी देना था। आपात बैठक बुलाई गई। उक्त बैठक में श्री
लालू प्रसाद यादव के अलावा विधायक दल के नेता के रूप में किसी के
भी नाम पर आम सहमति नहीं बन पा रही थी। राजद के ही अति महत्वकांक्षी
रंजन प्रसाद मुख्यमंत्री बनने के लिए सभी दांव-पेंच चल चुके थे।
रंजन प्रसाद के अंहकार और रूखे व्यवहार उस वक्त के सभी राजद विधायकों
को याद था। कोई भी रंजन प्रसाद को स्वीकारने को तैयार नहीं था।
अन्य विधायकों में से कई राजद नेताओं से नए नेता का नाम बताने को
कहा गया अधिकांश को सरकार गिरने का भय था और संशय के कारण कोई कुछ
भी नहीं बोल रहा था। काफी सोच-विचारने के बाद आम सहमति बनी राजद और
सरकार दोनों को बचाये रखने के लिए श्री लालू प्रसाद यादव की
धर्मपत्नी श्रीमती राबड़ी देवी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाय। श्रीमती
राबड़ी देवी का मुख्यमंत्री बनना संविधान का कहीं से भी अतिक्रमण नहीं
था। विपक्ष ने काफी हंगामा मचाया और अफवाह भी फैलाई की श्रीमती
राबड़ी देवी अशिक्षित हैं जबकि श्रीमती राबड़ी देवी शिक्षित हैं।
मालूम हो तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री स्वामी के. कामराज अंगूठा
छाप थे। स्वामी के. कामराज कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
भी रह चुके हैं। वर्तमान में ही नीतीश की पार्टी के ही उजियारपुर (समस्तीपुर)
लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्रीमती अश्वमेघ देवी केवल 5 वीं तक ही
शिक्षित हैं। श्रीमती राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बन जाने से
राष्ट्रीय जनता दल का भविष्य सुरक्षित हो गया, सरकार बच गई।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को विश्वसनीय उत्तराधिकारी मिल गया। आज
भी अधिकांश बिहारवासियों का मानना है कि अगर श्रीमती राबड़ी देवी के
अलावा किसी और को उस वक्त मुख्यमंत्री बनाया गया होता तो राष्ट्रीय
जनता दल (राजद) बिखर जाता, सरकार गिर जाती। जो विपक्ष चाहता था।
लोकसभा चुनाव 2004 में राष्ट्रीय जनता दल रामविलास पासवान
की पार्टी लोजपा
और कांग्रेस एक बैनर तले एक होकर चुनाव लड़े थे। राजद के 24, लोजपा
के 4, कांग्रेस के 3 सांसद चुनाव जीते। केवल 4 सांसद के बल ही पर
लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान
ने रेल मंत्रालय पर दावा
ठोक दिया था। वर्तमान में 4 सांसद वाले राजद अध्यक्ष श्री लालू
प्रसाद यादव के पास कोई मंत्रालय नहीं है। रेलमंत्री नहीं बन पाने
से रामविलास पासवान बौखलाकर राजद को ही बिहार में सत्ता से बैदखल करने के
लिए जमीन-आसमान एक कर दिया था। रामविलास पासवान
ने 2005 में इतना अधिक
दुष्प्रचार राजद के खिलाफ किया की सामान्य वर्गों में एकजुटता पिछड़ा
वर्ग में भगदड़ और अनुसूचित जाति में विभाजन हो गया, और राजद सत्ता
से बाहर हो गया। विधानसभा चुनाव 2005 के परिणाम को ध्यान में रखकर
राजद और लोजपा मिलकर 2010 में विधानसभा चुनाव लड़े। परन्तु नीतीश
पहले से मजबूत हैं। जिस रामविलास पासवान ने राजद को सत्ता से उखाड़ दिया वह
नीतीश को क्यों नहीं उखाड़ पा रहे हैं यह भी सोचनीय है। जिस आक्रमकता
से रामविलास पासवान राजद के खिलाफ जहर उगलते थे उतना नीतीश के खिलाफ नहीं
बोल रहे हैं। सामान्य वर्ग और दलितों को भी लोजपा अपने पक्ष में नही
कर पा रहा है। जबकि 2005 के फरवरी विधानसभा चुनाव को याद करिये
भुमिहार जाति के सूरजभान सिंह, राजपुत जाति के रामा सिंह रामविलास
पासवान के दायें और बायें दिखते थे। उस वक्त सामान्य वर्ग उपरोक्त दोनों
के कारण लोजपा के पक्ष में वोट दिया था। लोजपा अपनी रणनीति से भटक
गई है।
राष्ट्रीय जनता दल के बिहार प्रदेश महासचिव श्री एस.एन. यादव उर्फ
बबन यादव कहते हैं "जदयु और भाजपा के विजयी उम्मीदवारों से ज्यादा
वोट तो विपक्ष के पाले में पड़ा है। राजद का कोई भी उम्मीदवार जिनकी
हार हुई है उनका वोट अन्तर बहुत ही कम रहा है।" बिहार राजनीति के
जानकार यह भी कह रहे हैं कि नीतीश की सेवा यात्रा में जगह-जगह
विरोध होना नीतीश के लिए खतरे की घण्टी है। बिहार के समस्तीपुर शहर
के प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ0 दिनेश्वर प्रसाद यादव कहते हैं कि "प्रबुद्व
लोग जो विधानसभा चुनाव 2010 का विश्लेशण करेंगे तो पायेंगे कि सत्ता
पक्ष से ज्यादा लोग विपक्ष के पक्ष में हैं, नीतीश के खिलाफ बिहार
की जनता का आक्रोश शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों जगह दिखता प्रतीत
होता है।"
राष्ट्रीय जनता दल के नेता प्रतिपक्ष बिहार विधान परिशद प्रो0
गुलाम गौस ने विधान परिशद में एक पत्रिका का हवाला देकर कहा कि
नीतीश चारा घोटाला में शामिल हैं। हड़कम्प मच गया। इसी घटना पर सदन
में कई दिनों तक शोर-शराबा होता रहा। सदन में ही नीतीश ने कहा "कोई
बोलकर के तो देखे बखिया उधेड़ दूंगा।" बिहार के शिक्षित लोग नीतीश
के इस अशोभनीय और असंवैधानिक बयान को सुनकर काफी आहत हो गये। बिहार
के लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि नीतीश जो कि स्नातक तक ही
शिक्षित हैं ने इस प्रकार के शब्दों का चयन सदन के अन्दर क्यों किया
? बिहार के स्थानीय लोग बखिया उधेड़ने का मतलब आम तौर पर यही समझते
हैं कि किसी को भी बहुत तरीके से पीट देना जिससे उसकी हालत मरने
जैसी हो जाये। नीतीश के चारा घोटाला में नाम आने पर मनेर विधानसभा
क्षेत्र के राजद विधायक भाई दिनेश, समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र के
राजद विधायक अख्तारूल अस्लम शाहीन सहित राजद के कई विधायक सदन के
गेट पर नीतीश के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया।
नीतीश की कूटनीति को लोग अब समझने लगे हैं आने वाला चुनाव नीतीश के
लिए मुश्किल होने वाला है। बिहार में भ्रष्ट्राचार चरम सीमा पर है।
अपराधी दिन-दहाड़े बेखोफ होकर हत्या, लूट जैस वरदातों को अन्जाम दे
रहे हैं। गिरती कानून व्यवस्था पर राष्ट्रीय जनता दल के बिहार
प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 रामचन्द्र पूर्वे ने सत्ता पक्ष को चेतावनी भी
दी है अगर हालात नहीं सुधरे तो राजद प्रदर्शन करेगा।
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